दर्शकों को ही पीछे छोड़ जाती है ‘फैंटम’
खोदा पहाड़ और निकली चूहिया। फिल्म ‘फैंटम’ को देखकर यही लगता है। ‘बजरंगी भाईजान‘ जैसी शानदार फिल्म बनाने वाले कबीर खान से उम्मीद नहीं थी कि वे ऐसी फिल्म बनायेंगे। भले ही फिल्म की कहानी आतंकवाद के मुद्दे पर आधारित है, लेकिन यह देशभक्ति का जज्बा पाने में बिल्कुल भी कामयाब नहीं दिखती।

फिल्म की कहानी यह है कि सैफ अली खान को एक मिशन के लिए चुना जाता है। राॅ के इस सीक्रेट मिशन के तहत उसे पाकिस्तान को सबक सिखाने की जिम्मेदारी दी जाती है, जिसमें उन्हें कैटरीना कैफ का भी साथ मिलता है। कबीर खान ने लड़ाई को बहुत अच्छी तरह से दिखाया है। फिर भी वे ज्यादा सस्पेंस नहीं पैदा कर पाये हैं। कहानी कमजोर होने की वजह से पिट गई है।

इससे पहले सैफ अली खान एक थ्रिलर फिल्म ‘एजेंट विनोद’ में भी अभिनय कर चुके हैं। उसमें भी वे प्रभावित करने पाने में नाकाम रहा है। कुछ ऐसा ही उनके साथ फिल्म ‘फैंटम’ में भी हुआ है। कैटरीना ने भले की एक्शन के दृश्य कर लिये हों, लेकिन उनके चेहरे पर एक्सप्रेशन के अभाव की वजह से उनकी भूमिका ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ पाती है। उनके डाॅयलाॅग्स की समस्या अब तक बनी हुई है।

बताया जाता है कि इस फिल्म को बनाने में 55 से 60 करोड़ रुपये खर्च हो गये थे। फिल्म का प्रोमोशन भी ज्यादा अच्छी तरह से नहीं हो पाया था। वैसे तो फिल्म थोड़ी-बहुत चली थी, लेकिन यह दर्शकों को लंबे समय तक खींच पाने में नाकाम रही। इसकी कमाई भी 55 करोड़ रुपये में ही सिमट कर रह गई।

फिल्म देखकर ऐसा लगता है कि कबीर खान अब इतनी बड़ी फिल्में बनाने लगे हैं कि उनके पास छोटी-छोटी चीजों पर गौर करने का वक्त ही नहीं है। फिल्मांकन में कमी की वजह से कई जगहों पर सैफ का बढ़िया अभिनय भी दबा हुआ सा लग रहा है। हालांकि भारत से निकलकर फिल्म जब सीरिया, पाकिस्तान और बेरुत पहुंचती है, तो फिल्म थोड़ी ज्यादा रोमांचक हो जाती है।

कैटरीना बहुत सुंदर लगी हैं, लेकिन उन्हें अपने अभिनय पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि यह युद्ध पर आधारित फिल्म थी, तो उस दौरान निर्देशक को उनकी उड़ती जुल्फें आदि दिखाने से बचना चाहिए था, क्योंकि वहां थ्रिल पैदा करने की जरूरत थी न कि कोई रोमांटिक दृश्य पैदा करना था। इस फिल्म में ‘बजरंगी भाईजान’ का जादू तो नहीं है, लेकिन फिर भी टाइमपास के लिए आप इस फिल्म को देख सकते हैं।
