समाचारसमीक्षा

अजय की ‘रेड’ नहीं देखी, तो क्या देखा?

अजय देवगन की छवि धीरे-धीरे ऐसे अभिनेता के रूप में बनती जा रही है, जो अपराध, भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ बनने वाली फिल्मों में लीड भूमिका निभाते हैं और सुपरहीरो की तरह से आमजनों को इंसाफ दिलाने के लिए काम करते हैं। बाॅलीवुड के सिंघम के तौर पर पहचान बना चुके अजय की ताजा फिल्म ‘रेड’ भी कुछ अलग नहीं है।

इस फिल्म में भी उन्होंने एक तरह से काला धन के खिलाफ मुहिम छेड़ी है। सौरभ शुक्ला जो फिल्म में ताऊजी की भूमिका में हैं, अजय इनकम टैक्स आॅफिसर अमय पटनायक की भूमिका में उसके यहां छापा मारते हैं। पूरी फिल्म इस छापे के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आती है। बताया जाता है कि फिल्म 1981 में घटी एक सच्ची घटना पर आधारित है।

फिल्म की कहानी कुछ ऐसी है कि एक दिन अमय पटनायक को कोई फोन पर यह जानकारी देता है कि ताऊजी ने घर में अवैध तरीके से 420 करोड़ रुपये की संपत्ति छुपा रखी है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आज से करीब 40 साल पहले इस संपत्ति का कितना मूल्य रहा होगा।

रेड मारने के दौरान जमीन, दीवार, छत आदि सभी जगहों को खोद दिया जाता है और इनमें से सोने के बिस्कुट और नोट निकलते हैं। चूंकि पूरी फिल्म एक ही जगह के आसपास घूमती है, तो ऐसे में दर्शकों को फिल्म से जोड़ कर रख पाना निर्देशक के लिए आसान नहीं था, मगर निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने इसका निर्देशन इतने कमाल तरीके से किया है कि दर्शकों को पलक झपकाने तक का मौका नहीं मिल पाता है।

सबसे बड़ी बात है कि सौरभ शुक्ला ने गजब का अभिनय किया है। ताऊजी की भूमिका उन्होंने इतने दमदार तरीके से निभाई है कि देखकर यकीन ही नहीं होता कि कोई इतनी अच्छी एक्टिंग भी कर सकता है। फिल्म के डाॅयलाॅग्स भी जबर्दस्त हैं। फिल्म में एक जगह ताऊजी कहते हैं, ‘इस घर में कोई सरकारी अफसर मच्छर मारने नहीं आ सकता… तुम रेड मारने आये हो। खाली हाथ जाओगे।’ इस पर अमय का जवाब होता है, ‘मैं बस ससुराल से शादी वाले दिन खाली हाथ लौटा हूं, वरना जिसके घर सुबह-सुबह पहुंचा हूं, कुछ लेकर ही आया हूं।’

इस फिल्म के जरिये अजय ने यह संदेश दिया है कि यदि आॅफिसर ईमानदारी से अपना काम करें, तो किसी की क्या मजाल की काला धन जमा कर पाये या फिर भी भ्रष्टाचार को शह दे पाये। फिल्म में अमय की पत्नी पर जानलेवा हमला भी करवाया जाता है, इसके बाद भी आॅफिसर अमय पटनायक अपने लक्ष्य से नहीं डिगता।

दूसरे हाफ में फिल्म कुछ ज्यादा ही रोमांचक हो जाती है। एक ओर अजय देवगन तो दूसरी ओर सौरभ शुक्ला के अभिनय की वजह से फिल्म में जान आ गई है। रितेश शाह ने कमाल का स्क्रीनप्ले लिखा है। फिल्म लाजवाब है। यदि आप यह फिल्म नहीं देखते हैं, तो समझ लीजिए कि आपने कुछ नहीं देखा। ऐसा लिखना पड़ रहा है, क्योंकि फिल्म ही ऐसी है।