‘खुद के खिलाफ भी एक प्रदर्शन करें फिल्म इंडस्ट्री के लोग’
हिन्दी के वरिष्ठ लेखक, पत्रकार और मानवतावादी चिंतक अभिरंजन कुमार ने अपनी फेसबुक वॉल पर बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के लिए बहुत हद तक फिल्मों में दिखाई जाने वाली अश्लीलता और भड़काऊ गानों आदि को भी जिम्मेदार मानते हुए फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को कास्टिंग काउस की तरह इसके खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन करने की हिदायत देते हुए एक कटाक्ष भरा और समसामयिक पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने ऐसे लोगों को ढोंग करने के लिए सटीक शब्दों में लताड़ा है।

अभिरंजन कुमार ने अपनी पोस्ट में लिखा है, फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को अपनी इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच के रूप में होने वाले बलात्कारों के खिलाफ भी एक प्रदर्शन करना चाहिए और उस प्रदर्शन में आपस में ही एक-दूसरे को फांसी के फंदे पर लटका देना चाहिए, क्योंकि इस इंडस्ट्री में यह जो चल रहा है, उसमें प्रायः सबकी मिलीभगत है।

उन्होंने लिखा है कि फिल्म इंडस्ट्री के जो लोग इस पहले प्रदर्शन से बच जाएं, उन्हें एक दूसरा प्रदर्शन अपनी फिल्मों में दिखाई जाने वाली नग्नता, अश्लीलता और भड़काऊ गानों के खिलाफ करना चाहिए, क्योंकि देश में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं की ये एकमात्र वजह भले न हों, पर एक वजह तो हैं ही। पहले प्रदर्शन से बच गए लोग इस दूसरे प्रदर्शन में एक-दूसरे को फांसी के फंदे पर लटकाकर इंसाफ के लिए अपनी प्रतिबद्धता साबित कर सकते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार ने इस पोस्ट में लिखा है, और अगर ये लोग ऐसा नहीं करते, तो कम-से-कम सुधरने का प्रयास करें। और अगर सुधर नहीं सकते, तो सोचिए कितने ढोगी हैं ये लोग। स्त्रियों की आबरू को हर फिल्म में बेचने वाले ये लोग किस मुंह से स्त्रियों पर होने वाले अपराधों के विरोध की बात करते हैं?

अभिरंजन कुमार की इस पोस्ट लोग अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया दे रहे हैं और अधिकतर लोगों ने उनकी इस पोस्ट से सहमति जताई है। इस पोस्ट को लोग लाईक करने के साथ तेजी से शेयर भी कर रहे हैं।

