…तो सांसदों से इसलिए चिढ़े हैं जावेद अख्तर साहब
पिछले दिनों जब लोकसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, तो इस दौरान सदन की कार्यवाही देखने वालों का भरपूर मनोरंजन हुआ। इसकी वजह यह थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई सांसदों ने कई शेर पढ़े और कई कविताएं भी पढ़ीं।

हालांकि, प्रसिद्ध गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने वह नोटिस किया जो बाकी लोग नोटिस नहीं कर सके। उन्होंने लोकसभा की इस कार्यवाही को कविताओं का अपमान बताया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘‘मैं हाथ जोड़कर और पूरी विनम्रता के साथ लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों के सभी सांसदों से यह आग्रह करता हूं कि वह सभी कम-से-कम कविताओं को बख्श दें। बिना किसी अपवाद के इस 12 घंटे के दौरान पढ़े गये हर शेर में शब्द गलत थे। साथ ही इनका उच्चारण भी सही नहीं था।’’

अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में 12 घंटे तक बहस चली और इसमें प्रधानमंत्री सहित कई सांसदों ने हिस्सा लिया। महाराष्ट्र के सांसद रामदास अठावले ने जब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपनी बात रखी, तो उन्होंने कविता पाठ ही कर डाला। यही नहीं आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान ने भी एक कविता पढ़ी, जिसके जरिए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अच्छे दिन के नारे का मजाक बनाया।

लोकसभा में सांसदों द्वारा ऐसा किया जाना जावेद अख्तर को रास नहीं आया। जावेद अख्तर ने जो कहा वह गलत नहीं है, क्योंकि एक गीतकार ही कविताओं के सम्मान और अपमान को समझ सकता है और कविताओं को मिलने वाले सम्मान से उसे खुशी होती है, जबकि अपमान से वह आहत होता है। जावेद अख्तर साहब के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है।

दोस्तों, बीते 20 जुलाई को जब लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हुई, तो इस दौरान सरकार और विपक्षी दलों ने एक-दूसरे पर तीखा हमला बोला और आरोप भी लगाए। राहुल गांधी ने भी नरेंद्र मोदी पर हमला बोला, लेकिन बाद में उन्होंने सभी को हैरान करते हुए मोदी को गले लगा लिया। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इसे अमर्यादित बताते हुए राहुल गांधी में परिपक्वता का अभाव बताते हुए उन्हें इसके लिए फटकार भी लगाई।

