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फिलिमची एक्सक्लूजिवः ऋतिक की ‘सुपर 30’ के आनंद कुमार कहीं किसी और का तो नहीं ले रहे श्रेय!

जब से ऋतिक रोशन ने अपनी फिल्म ‘सुपर 30’ की शूटिंग शुरू की है, एक बार फिर से आनंद कुमार का नाम सुर्खियों में आ गया है। पटना में सुपर 30 के नाम से निःशुल्क कोचिंग चलाकर हर साल लगभग सौ प्रतिशत बच्चों को आईआईटी में पहुंचाने वाले आनंद कुमार को आज पूरा देश जान रहा है। लेकिन क्या इतना जानना ही काफी है? क्या जो हमने अब तक देखा और सुना, वही सच है? या फिर सच कुछ और भी है?

इस पोस्ट का मकसद आनंद कुमार की मेहनत और लगन पर सवाल उठाना बिल्कुल भी नहीं है, लेकिन वर्ष 2007 तक उनका साथ देने वाले बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद के सपोर्ट में शुरू हुए एक आॅनलाइन पीटिशन ने उन पर सवाल तो जरूर खड़े कर दिये हैं। अभयानंद जो ‘सुपर 30’ की ही तरह ‘रहमानी 30’ चलाकर बच्चों को आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों में हर साल भेज रहे हैं, उनका यह दावा है कि आनंद कुमार द्वारा चलाये जा रहे ‘सुपर 30’ का आइडिया असल में उनके दिमाग की उपज थी, लेकिन आज सारा श्रेय आनंद कुमार खुद लेने में लगे हैं।

इसी चीज को लेकर उनके समर्थन में एक आॅनलाइन पीटिशन साइन होने के लिए घूम रहा है। ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म ‘सुपर 30’ की बुनियाद को ही गलत बताते हुए इसमें जो कहा गया है, उसे आप यहां अक्षरशः पढ़ेंः ‘‘सर्वप्रथम श्री आनंद का यह दावा ही गलत है कि सुपर-30 की बुनियाद उन्होंने रखी थी। पूरा बिहार जानता है कि पूर्व पुलिस महानिदेशक श्री अभयानंद ही थे, जिन्होंने इस सोच को उनके साथ साझा किया और तत्पश्चात् सुपर-30 की नींव पड़ी। और श्री आनंद ने क्या किया, श्रेय देना तो दूर की बात है, वो तो श्री अभयानंद का जिक्र भी नहीं करते।’’

किसी से प्रेरित होकर उसकी बायोपिक बनाना गलत नहीं है, लेकिन यह बात भी सही है कि फिल्में समाज का आईना होती हैं। इसमें आपसे उम्मीद की जाती है कि आप केवल सच ही दिखाएं। अभयानंद आनंद कुमार के साथ जुड़े थे, यह सभी को मालूम है। आज वे ‘रहमानी 30’ के नाम से निःशुल्क कोचिंग चलाकर जिस तरह से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के भी गरीब बच्चों को पढ़ाकर आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों तक पढ़ने के लिए पहुंचा रहे हैं, वह कोई छोटा-मोटा काम नहीं है। रिटायर होने के बाद भी इतनी बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेना तारीफेकाबिल है।

अभयानंद का जन्म झारखंड के देवघर में हुआ था और वे 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी एवं शिक्षाविद हैं, जिन्हें अगस्त, 2011 में बिहार का 48वां डीजीपी चुना गया था। उनके पिता श्री जगदानंद भी 1955 बैच के आईपीएस अधिकारी थे और 1985-86 के दौरान बिहार के 28वें डीजीपी रहे थे। पटना के साइंस काॅलेज में वे भौतिकी के टाॅपर रहे थे। वैचारिक मतभेदों की वजह से आनंद कुमार से अलग होने के बाद ‘रहमानी 30’ शुरू करने वाले अभयानंद प्रवेश परीक्षा के जरिये ही स्टूडेंट्स को चुनते हैं। आईआईटी में उपलब्ध महज करीब पांच हजार सीटों के लिए 15 लाख स्टूडेंट्स परीक्षा देते हैं। ऐसे में अपने सभी बच्चों को इसमें सफलता दिलवा देना कोई मामूली काम नहीं है।

अंत में सौ बात की एक बात तो यही है जो काम आनंद कुमार कर रहे हैं, वही पूर्व डीजीपी अभयानंद भी कर रहे हैं। दोनों ने पहले साथ में काम किया है, यह बात भी जगजाहिर है। ऐसे में जब ऋतिक रोशन ‘सुपर 30’ पर फिल्म बना रहे हैं और दूसरी ओर इसके श्रेय को लेकर इतना बड़ा विवाद शुरू हो गया है, तो क्या फिल्म के निर्माताओं का यह फर्ज नहीं बनता है कि वे सच्चाई की तह तक जाने का कम-से-कम एक प्रयास करें? दोनों ही सराहनीय काम कर रहे हैं और इसके लिए देश उन्हें सलाम भी करता है, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि एक फिल्म की वजह से किसी के साथ अन्याय भी हो जाए।