काश! जाने से पहले यह देख पातीं श्रीदेवी
जब केवल 54 वर्ष की उम्र में श्रीदेवी के निधन की खबर आई, तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि बाॅलीवुड की इतनी खूबसूरत, जिंदादिल, चुलबुली और दिलकश अभिनेत्री अब फिर कभी नहीं दिखेंगी। बचपन से ही सिनेमा के क्षेत्र में पहचान बनाने वाली श्रीदेवी ने दक्षिण भारतीय फिल्मों में सफलता का झंडा गाड़ने के बाद बाॅलीवुड का रुख किया।

शुरुआत में तो ठीक से हिंदी भी ठीक से नहीं बोल पाती थीं, लेकिन धीरे-धीरे अपनी मेहनत और लगन के दम पर वे हिंदी फिल्मों में ऐसी छा गईं कि सदमा, मिस्टर इंडिया, नगीना, हिम्मतवाला, जुदाई, इंग्लिश विंग्लिश और माॅम जैसी शानदार फिल्में करते हुए वे 300 फिल्मों के आंकड़े तक पहुंच गईं। बाॅलीवुड का यह नगीना बड़े ही बड़ा सदमा देकर हमेशा के लिए विदा हो गया, उनकी यादें उनकी फिल्मों के रूप में हमेशा ताजा रहेंगी।

वह अचानक से चली तो गईं, लेकिन उनकी एक बड़ी हसरत अधूरी ही रह गई। वह अपनी बेटी जाहन्वी को बड़े पर्दे पर देखना चाहती थीं, लेकिन इससे पहले कि उनकी यह तमन्ना पूरी होती, उन्होंने हमेशा के लिए आंखें मूंद ली।

श्रीदेवी को जाहन्वी से बहुत लगाव था। यही वजह थी कि वे हमेशा ही उसका मार्गदर्शन करती रहती थीं। जितना ज्यादा वह अपनी बेटी के साथ कई बार सख्त दिखती थीं, उतनी ही अच्छी वह उसकी दोस्त भी थीं। वह जाहन्वी के बाॅलीवुड डेब्यू को लेकर बड़ी गंभीर थीें।

अपनी इस बेटी को बाॅलीवुड में शानदार तरीके से जमाने के लिए उनकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह एक-एक छोटी-से-छोटी चीजों का भी बड़ा ख्याल रखती थीं। उनकी तमन्ना थी कि जाहन्वी बिल्कुल उन्हीं की तरह बड़ा मुकाम हासिल करे।

जाहन्वी फिलहाल धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बन रही फिल्म ‘धड़क’ की शूटिंग में लगी हैं। उसके इस प्रोजेक्ट में भी श्रीदेवी की ही बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने ही जाहन्वी के लिए धर्मा प्रोडक्शन का चुनाव किया था। जाहन्वी के साथ इस फिल्म में शाहिद कपूर के भाई ईशान खट्टर भी दिखने वाले हैं।

बेटी का उत्साह कभी ठंडा न पड़ने पाए, इसके लिए श्रीदेवी अक्सर उसके सेट पर पहुंच जाया करती थीं, उसका हौसला बढ़ाने के लिए। उन्हें मालूम था कि यह उनकी बेटी की पहली फिल्म है, तो वह कैसा महसूस कर रही होगी, इसलिए वह हमेशा ही उसका उत्साह बढ़ाती रहती थीं।

श्रीदेवी ने न केवल जाहन्वी को डांस के लिए खास ट्रेनिंग भी दिलाई, बल्कि उसकी हिंदी को भी मजबूत बनाने पर काफी काम किया। इससे बड़े दुख की बात एक बेटी के लिए भी क्या हो सकती है कि जिसके सपनों को पूरा करने के लिए वह इतनी मेहनत कर रही है, वही उसका साथ छोड़कर फिर कभी न लौटने के लिए चली गई है।

खैर, जाहन्वी के लिए अब यह फिल्म किसी चुनौती से कम नहीं है। यह अब उसकी भावनाओं से जुड़ गया है। ‘धड़क’ मराठी फिल्म सैराट का हिंदी रीमेक है और इसके इसी साल रिलीज होने की संभावना है। जाहन्वी की यह फिल्म यदि अच्छी चलती है और इसकी वजह से वे बाॅलीवुड में स्थापित हो पाती हैं, तो श्रीदेवी की आत्मा की शांति के लिए इससे बड़ी चीज और कुछ नहीं होगी।

