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‘सूरमा’ देखने से पहले इसे जरूर पढ़ लें

हमने और आपने बहुत ही प्रेरणास्प्रद कहानियां सुनी हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी हैं, जिनके बारे में हमें बहुत कम जानकारी हैं, फिर भी वे हमारे दिलों को छू जाती हैं। हाॅकी खिलाड़ी संदीप सिंह की भी कहानी कुछ ऐसी ही है, जो भले ही बहुत से लोगों के लिए नई है, मगर यह कभी न खत्म होने वाली बाधाओं से पार पाकर अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा देती है।

यह कहानी हाॅकी के एक ऐसे योद्धा के बारे में है, जिसने उम्मीद खोने की बजाय खुद को फिर से खड़ा किया। अपनी प्रतिभा को और धार दी। अंत में जाकर अपने लक्ष्य को हासिल कर ही लिया। शाद अली के निर्देशन में बनी फिल्म सूरमा हाॅली के लीजेंड संदीप सिंह की इसी कहानी को दिखाती है।

इस 131 मिनट की कहानी में हाॅकी के इस जांबाज के जीवन में आये उतार-चढ़ाव को बड़ी ही खूबसूरती के साथ पेश किया गया है। खेल पर आधारित यह मूवी आपका दिल जीत लेगी। भले ही आपको मालूम हो कि फिल्म में अगले पल क्या होने वाला है, फिर भी इससे आपकी रुचि कम होने का नाम नहीं लेगी।

फिल्म के पहले 10 मिनट में हमें पता चलता है कि सिंह (दिलजीत दोसांझ) असल में कभी भी हाॅकी को लेकर गंभीर नहीं थे। उनके कोच करतार सिंह हमेशा उन्हें खेल में रुचि बढ़ाने को कहते थे। सिंह के बड़े भाई बिक्रम (अंगद बेदी) राष्ट्रीय हाॅकी टीम में स्थान नहीं पा सके। ऐसे में सिंह ने हाॅकी में भारत का प्रतिनिधित्व करने व अपनी प्रेमिका हाॅकी खिलाड़ी हरप्रीत (तापसी पन्नू) का प्यार जीतने के लिए हाॅकी खेलने का फैसला किया।

पहले हाफ में सूरमा बड़ी ही साधारण नजर आती हैं, जहां सिंह के एक लवर ब्वाॅय से गंभीर एथलीट में तब्दील होने की कहानी देखने को मिलती है। दूसरे हाफ में मूवी दर्शकों को बांध लेती है, जहां दृश्य यूरोप पहुंचता है और हाॅकी का मैदान नजर आता है। अंत तक दर्शकों की रुचि फिल्म में बनी रहती है।

जीत की खुशी, हारने का गम, संकट की घड़ी में टूट रहे हौंसले और प्रैक्टिस के वक्त के जुनून, इन सभी भावों को फिल्म में बड़े ही लाजवाब तरीके से दिखाया गया है। खासकर दलजीत दोसांझ ने अपने अभिनय का लोहा मनवा लिया है। तापसी पन्नू का भी आत्मविश्वास देखते बन रहा है। कुल मिलाकर फिल्म देखने लायक है। इसे आप जरूर देख लें।